सरस्वती शिशु मंदिर में मातृ सम्मेलन, बच्चों के संस्कारों पर हुआ मंथन
सरस्वती शिशु मंदिर में मातृ सम्मेलन, बच्चों के संस्कारों पर हुआ मंथन
माताओं से बच्चों को मोबाइल से दूर रखकर नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का आह्वान
बरेली। सरस्वती शिशु मंदिर, नैनीताल मार्ग में शनिवार को शिशुओं के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से मातृ सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बाल कल्याण समिति की सदस्या पूजा बॉस, कार्यक्रम अध्यक्षा सुभाषिनी जायसवाल तथा मुख्य वक्ता मंजू अग्रवाल ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया।
प्रधानाचार्य संजीव कुमार पाण्डेय ने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में माता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। परिवार और विद्यालय के समन्वय से ही संस्कारवान समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने माताओं से बच्चों में अनुशासन, नियमित अध्ययन, समयबद्ध दिनचर्या तथा भारतीय संस्कृति के प्रति रुचि विकसित करने का आग्रह किया।
मुख्य वक्ता मंजू अग्रवाल ने कहा कि बच्चों को मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से दूर रखते हुए पुस्तक पठन, योग, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना चाहिए। मुख्य अतिथि पूजा बॉस ने मां को बच्चे की प्रथम पाठशाला बताया, जबकि सुभाषिनी जायसवाल ने प्रारंभिक संस्कारों को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया।
कार्यक्रम में छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कारों पर चर्चा हुई। अंत में आभार व्यक्त कर शांति पाठ के साथ सम्मेलन का समापन किया गया।